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कर्नपुरा की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

कर्नपुरा की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

विद्यालय, तालाब और रास्ते की जमीन पर फर्जीवाड़े से कब्जा करने का दावा, जांच की मांग तेज गांडेय अंचल के कर्नपुरा में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे सार्वजनिक उपयोग की जमीन को निजी संपत्ति बताकर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। मामले को लेकर गांव में आक्रोश बढ़ गया है और ग्रामीण प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।ग्रामीणों द्वारा उपायुक्त को सौंपे गए आवेदन में कहा गया है कि मौजा कर्नपुरा, थाना संख्या-575 के खाता संख्या-19 और प्लॉट संख्या-05 की करीब 6.40 एकड़ गैरमजरुआ सरकारी भूमि पर अवैध दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह जमीन वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में रही है, जहां सरकारी विद्यालय संचालित होता है, जलाशय स्थित हैं तथा गांव के लोगों का प्रमुख आवागमन मार्ग भी इसी भूमि से होकर गुजरता है। फर्जी कागजात बनाकर रसीद कटवाने का आरोप शिकायतकर्ता कृष्णा राणा समेत कई ग्रामीणों का आरोप है कि कर्नपुरा निवासी जीतू राणा ने कुछ कथित भू-माफियाओं के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उसी के आधार पर ऑनलाइन रसीद कटवा ली। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले तीन वर्षों से इस मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी मामले को लेकर ग्रामीणों ने सामुदायिक विकास प्रखंड सह अंचल कार्यालय, गांडेय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

 संचित कुमार/गांडेय