🚨 फुटपाथ दुकानदारों की बपौती नहीं! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला — "पैदल चलना नागरिकों का मूल अधिकार, हटाओ अवैध कब्जे"
गोवा के मप्यूसा मामले के बाद देशभर के नगर निगमों को सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: जनता को सड़क पर मौत के मुंह में नहीं धकेल सकते! नई दिल्ली। देशभर में फुटपाथों पर बढ़ते अवैध कब्जों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि फुटपाथ किसी व्यक्ति, दुकानदार या अतिक्रमणकारी की निजी संपत्ति नहीं हैं।** फुटपाथों का मूल उद्देश्य पैदल यात्रियों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना है और इस अधिकार का संरक्षण करना स्थानीय प्रशासन तथा नगर निकायों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। गोवा के मप्यूसा (Mapusa) क्षेत्र से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि यदि फुटपाथों पर अवैध कब्जों को हटाया नहीं जाता और नागरिकों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ता है, तो यह सीधे-सीधे उनके जीवन और सुरक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि **भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (Right to Life)** के अंतर्गत केवल जीवित रहने का अधिकार ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार भी शामिल है। जब फुटपाथ अतिक्रमण के कारण बंद हो जाते हैं और लोग वाहनों के बीच सड़क पर चलने को मजबूर होते हैं, तो उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। ऐसी स्थिति को किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि नगर निगमों और स्थानीय प्रशासन का दायित्व केवल राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों को आम जनता के उपयोग के लिए सुरक्षित रखना भी है। यदि फुटपाथों पर अवैध कब्जे बने रहते हैं, तो इसके लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल गोवा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के सभी राज्यों, नगर निगमों और स्थानीय निकायों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सार्वजनिक मार्गों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखना अब केवल प्रशासनिक विकल्प नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है।
जनता की ओर से कुछ सीधे सवाल
* क्या दिल्ली-एनसीआर के फुटपाथ वास्तव में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित हैं?
* क्या स्थानीय नगर निगम और प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के इस संदेश को गंभीरता से लागू करेंगे?
* कब तक आम नागरिक सड़क पर जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर रहेंगे?
* अवैध कब्जों के खिलाफ नियमित अभियान कब शुरू होंगे?
* क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?
देश की जनता अब यह जानना चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद **दिल्ली, एनसीआर और अन्य शहरों के प्रशासन इस आदेश को जमीन पर लागू करने की शुरुआत कब करेंगे?**
✍️ संवाददाता :चंदन सिंह ( दिल्ली क्राइम प्रेस )