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गुजरात सरकार का 'फॉरेस्ट राइट्स एक्ट- 2006' साबरकांठा के आदिवासियों के लिए वरदान साबित हुआ

साबरकांठा में फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के तहत 3226 परिवारों के ज़मीन के दावे मंज़ूर: आदिवासियों को कानूनी अधिकार मिले

गुजरात सरकार का 'फॉरेस्ट राइट्स एक्ट-2006' साबरकांठा के आदिवासियों के लिए वरदान साबित हुआ पीढ़ियों से खेती कर रहे ज़मीन के मालिक अब ज़मीन के मालिक बन गए: विंची गांव के मीराभाई गमार को 1.5 बीघा ज़मीन का मालिकाना हक मिला

पीढ़ियों से जंगल के इलाकों में रहने और खेती करने वाले अनुसूचित जनजातियों के लिए गुजरात सरकार द्वारा लागू किया गया 'फॉरेस्ट राइट्स एक्ट-2006' सामाजिक और आर्थिक तरक्की के लिए एक बड़ा कदम बन रहा है। इस कानून को असरदार तरीके से लागू करने की वजह से अब तक साबरकांठा ज़िले में लगभग 3226 आदिवासी परिवारों के ज़मीन के दावे मंज़ूर हो चुके हैं। सालों से ज़मीन पर खेती करने वाले मज़दूरों को अब उस ज़मीन का कानूनी मालिकाना हक मिल रहा है, जो आदिवासियों को समाज की मुख्यधारा में लाने का एक मज़बूत ज़रिया बन गया है।

पोशिना तालुका के विंची गांव के मीराभाई मालाभाई गमार, जिन्हें इस एक्ट से पर्सनली फायदा हुआ है, इस पर अपनी खुशी जाहिर करते हैं। मीराभाई गमार ने कहा कि उन्हें फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के तहत 1.5 बीघा जमीन का मालिकाना हक मिला है। कड़ी मेहनत और अनिश्चितता के बाद, अब जब उन्हें कानूनी तौर पर इस जमीन का हक मिल गया है, तो वे अभी इस पर खेती कर रहे हैं और अपने परिवार का गुज़ारा कर रहे हैं। उन्होंने फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के तहत जमीन का हक देने के लिए गुजरात सरकार का दिल से शुक्रिया अदा किया।

साबरकांठा जिले में फॉरेस्ट राइट्स एक्ट-2006 के तहत आदिवासियों के हित में बहुत तारीफ़ के काबिल काम हुआ है। इस एक्ट को असरदार तरीके से लागू करने की वजह से जिले के करीब 3226 दावेदारों को जंगल की जमीन का मालिकाना हक मिला है। सरकार का मुख्य मकसद यह रहा है कि जो अनुसूचित जनजातियां और दूसरी पारंपरिक जनजातियां सालों से जंगल के इलाकों में रहकर खेती कर रही हैं, उन्हें उनकी खेती और रहने का हक मिले, ताकि वे बिना किसी डर के इज्ज़त से अपनी ज़िंदगी जी सकें। यह कानून जनजातियों के जीवन में स्थिरता ला रहा है।
रिपोर्टर : जीतूभा राठौड़ साबरकांठा गुजरात