ऑनलाइन गोद दिलाने के नाम पर ठगी का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय गैंग के दो आरोपी दबोचे....!
संवाददाता सुहैल अहमद दिल्ली
उत्तर जिला साइबर थाना पुलिस ने बच्चों को गोद दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को उत्तर प्रदेश के बरेली से गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान 46 वर्षीय सचिन अग्रवाल और 52 वर्षीय राकेश कुमार उर्फ डॉ. आर.के. के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार राकेश पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट है और वह फर्जी NGO रसीदें, अस्पतालों की मुहरें तथा नकली मेडिकल दस्तावेज़ तैयार कर गिरोह की ठगी को विश्वसनीय बनाने का काम करता था।
मामले का खुलासा बुराड़ी निवासी 30 वर्षीय महिला की शिकायत पर हुआ, जिसने बच्चे को गोद लेने की चाह में आरोपियों के झांसे में आकर ₹1.37 लाख ट्रांसफर कर दिए। आरोपी खुद को चाइल्ड एडॉप्शन संस्था का प्रतिनिधि बताकर रजिस्ट्रेशन, बुकिंग, ट्रांसपोर्ट और अन्य शुल्क के नाम पर लगातार पैसे मांगते रहे। भरोसा जीतने के लिए फर्जी NGO रसीदें, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और अन्य नकली दस्तावेज़ भी भेजे गए। जब महिला ने बच्चे की जैविक मां से मिलने की बात कही तो आरोपियों ने संस्था की नीति का हवाला देकर मना कर दिया। अंतिम किस्त लेने के बाद आरोपियों ने फोन बंद कर लिया, जिसके बाद पीड़िता ने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
जांच के दौरान साइबर थाना उत्तर की टीम ने करीब 100 मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, IMEI और बैंक खातों की तकनीकी जांच की। लगातार निगरानी और कई छापेमारी के बाद पुलिस ने 31 जुलाई को बरेली से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, छह डेबिट कार्ड, बैंक पासबुक, दो पैन कार्ड तथा अस्पतालों और डॉक्टरों की 14 फर्जी मुहरें बरामद हुई हैं।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ऑनलाइन विज्ञापन देकर खुद को वैध गोद लेने की प्रक्रिया कराने वाला बताते थे। लोगों से अलग-अलग मदों में पैसे लेने के बाद फर्जी दस्तावेज़ भेजकर भरोसा कायम रखते और तय तारीख पर बच्चे की डिलीवरी का झांसा देकर अंतिम भुगतान भी वसूल लेते थे। रकम मिलते ही मोबाइल बंद कर फरार हो जाते थे। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।