पुलिस के प्रति आम जनता के विचार
भले ही पुलिस की लाख आलोचना करें लेकिन संकट और विपदा में पुलिस ही याद आती..!
बेवजह और बेमतलब पुलिस की आलोचना से बचें, पुलिस के महत्व को समझते हुए पुलिस का मनोबल बढ़ाने का काम भी समय-समय पर करें!
कहते हैं कि संकट या विपदा में पुलिस ही याद आती है, हम पुलिस की लाख आलोचना करें या बुराई लेकिन जब कभी भी कोई मामला घटित होता है तो कह सकते हैं कि संकट के समय में फिर पुलिस को ही याद किया जाता है, पुलिस त्योहारो को सकुशल संपन्न करने के लिए पूरे प्रदेश में कहीं कोई कसर बाकी नहीं छोड़ती। पुलिस ने बेहतर ढंग से काम करते हुए दोनों हर समुदाय के लोगों को विश्वास में लेकर शांति समिति के माध्यम से समझा कर अपना काम बखूबी निभाती है तो वहीं आम जनता ने भी पुलिस को सहयोग प्रदान करते हुए शांति सद्भावना सौहार्द बनाए रखती है मात्र कुछ लोग ही होते है जो सौहार्द को बिगड़ते हैं लेकिन ज्यादातर लोग त्यौहारो पर एक मिसाल कायम भी करते हैं। पुलिस अपने लक्ष्य उद्देश्य को पूरा करने में सफल रहती है तो वहीं आम जनता में भी सद्भावना और स्वार्थ का मिला-जुला संगम देखने को मिलता रहता है, हर त्योहार संपन्न कराने के लिए पुलिस सक्रिय और गतिशील बनी रहती हैं।अब होली हो या दीपावली खुद नही मनाती हां अगले दिन चूंकि पुलिस की होली दीपावली होती है और इस दिन कुछ घंटे में फुर्सत से पुलिस अपनी त्यौहार अपने अंदाज में बनाती है, कुछ ही घंटे में जब पुलिस अपनी होली या दीपावली जैसे त्योहारों मना रही होती है तो व्यवस्था को देखकर लगता है कि वास्तव में अगर एक दिन या दो दिन के लिए पुलिस ना हो तो सिस्टम कैसा हो सकता है, इसकी महज़ कल्पना करके ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं, देश की ही बात करें तो जब पुलिस अपनी होली बना रही होती है तो सड़कों पर जाम और व्यवस्था बिल्कुल चरमरा कर रह जाती है और फिर हमें लगता है कि बाकी दिनों अगर पुलिस ना हो तो सिस्टम को चलाना कितना मुश्किल हो सकता है और फिर यही सोच पैदा होती है कि वास्तव में संकट विपदा और परेशानी में पुलिस हरदम काम आती है और याद आती है, इसलिए बेहतर हो कि हम पुलिस को हर यथा संभव सहयोग समय-समय पर प्रदान करते रहें और इस बात के महत्व को समझे कि पुलिस विभाग हमारे लिए कितना जरूरी है, पुलिस पब्लिक रिलेशन किसी गलत सोच या धारणा पर आधारित है ना हो बल्कि विश्वसनीय धारणा पर आधारित हो और यह धारणा जितनी मजबूत और बलशाली होगी तो परस्पर एक दूसरे के रिश्ते भी उतने ही मजबूत होंगे, इसलिए बेवजह और बेमतलब पुलिस की आलोचना से बचें, पुलिस के महत्व को समझते हुए पुलिस का मनोबल बढ़ाने का काम भी समय-समय पर करें, अगर नहीं भी कर सकते तो कम से कम पुलिस के प्रति गलत धारणा और सोच ना रखें।
रिपोर्टर सत्येंद्र सैनी