राशन विक्रेताओं पर दोहरी मार: खाली बोरे वापस लेगी सरकार, 500 से कम कार्ड वाली दुकानों का होगा विलय
लखनऊ, 11 मार्च 2026 प्रदेश में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर सरकार नई नीति पर काम कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत जिन उचित दर की दुकानों पर 500 से कम राशन कार्ड जुड़े हैं, उन्हें अन्य दुकानों के साथ विलय करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि इस कदम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
सूत्रों के अनुसार प्रदेश में लगभग 50 हजार से अधिक राशन विक्रेता इस निर्णय से प्रभावित हो सकते हैं। वर्तमान में कई ऐसी दुकानें हैं जिन पर राशन कार्ड धारकों की संख्या बहुत कम है, जिससे दुकानदारों की आय भी सीमित रहती है और वितरण व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर इन दुकानों के एकीकरण का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
राशन विक्रेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कर रहे हैं और सभी नियमों का पालन करते हैं। ऐसे में यदि छोटी दुकानों का विलय किया जाता है तो बड़ी संख्या में दुकानदारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
विक्रेताओं ने यह भी बताया कि पहले राशन के बोरे और अन्य व्यवस्थाओं से होने वाली कुछ अतिरिक्त आय से दुकान का खर्च निकल जाता था, लेकिन अब कई व्यवस्थाओं में बदलाव होने से उनकी आमदनी पहले से कम हो गई है। यदि दुकानों का विलय लागू होता है तो कई विक्रेताओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
वहीं प्रशासन का कहना है कि अभी इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, ताकि राशन वितरण व्यवस्था सुचारु रहे और किसी पक्ष को अनावश्यक नुकसान न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को लागू किया जाता है तो सरकार को प्रभावित विक्रेताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था या मुआवजे पर भी विचार करना चाहिए, जिससे उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके।
पत्रकार- लव कुमार
