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10 वर्षों से बढ़ रही विशाल थायरॉइड गांठ का महाराजा अग्रसेन अस्पताल में सफल जटिल ऑपरेशन

वरिष्ठ एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जन डॉ. विवेक अग्रवाल एवं उनकी टीम ने किया टोटल थायरॉयडेक्टॉमी और पैराथायरॉइड ऑटोट्रांसप्लांटेशन

नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली स्थित महाराजा अग्रसेन अस्पताल में वरिष्ठ एवं अनुभवी एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जन डॉ. विवेक अग्रवाल एवं उनकी विशेषज्ञ टीम ने एक अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 60 वर्षीय महिला की विशाल थायरॉइड गांठ (मल्टीनोड्यूलर गॉयटर) को सफलतापूर्वक निकाला। मरीज पिछले लगभग 10 वर्षों से गर्दन में बढ़ती सूजन से परेशान थीं, जो पिछले 6 महीनों में तेजी से बढ़ने लगी थी। डॉ. विवेक अग्रवाल एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी के क्षेत्र में लंबे अनुभव वाले विशेषज्ञ सर्जन हैं और जटिल थायरॉइड, पैराथायरॉइड एवं ब्रेस्ट सर्जरी में विशेष दक्षता रखते हैं। उन्होंने अब तक अनेक जटिल एंडोक्राइन सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं

मरीज की समस्या और ऑपरेशन की आवश्यकता

मरीज की गर्दन में मौजूद थायरॉइड की गांठ अब इतनी बड़ी हो चुकी थी कि वह बाहर से स्पष्ट दिखाई देने लगी थी। मरीज को गर्दन में भारीपन और असहजता महसूस होने लगी थी। चिकित्सकों के अनुसार यदि इस स्थिति का समय पर इलाज न किया जाता, तो भविष्य में सांस लेने, निगलने तथा बोलने में गंभीर दिक्कतें उत्पन्न हो सकती थीं। जांच एवं अल्ट्रासाउंड में पाया गया कि मरीज के दोनों थायरॉइड लोब अत्यधिक बढ़े हुए थे तथा उनमें कई बड़े सॉलिड और सिस्टिक नोड्यूल्स मौजूद थे। कुछ गांठों का आकार लगभग 3 सेंटीमीटर तक पहुंच चुका था। तेजी से बढ़ती गांठ को देखते हुए विशेषज्ञ टीम ने तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया।

 

क्या होती है टोटल थायरॉयडेक्टॉमी?

टोटल थायरॉयडेक्टॉमी (Total Thyroidectomy) एक अत्यंत सूक्ष्म एवं जटिल सर्जरी है, जिसमें पूरी थायरॉइड ग्रंथि को शरीर से बाहर निकाला जाता है। यह सर्जरी विशेष रूप से तब आवश्यक होती है जब:

थायरॉइड की गांठ बहुत बड़ी हो जाए

गांठ तेजी से बढ़ रही हो

सांस या भोजन नली पर दबाव पड़ रहा हो

कैंसर की आशंका हो

मरीज को निगलने या बोलने में परेशानी हो रही हो


डॉ. विवेक अग्रवाल के नेतृत्व में ऑपरेशन के दौरान पूरी थायरॉइड ग्रंथि को सावधानीपूर्वक निकाला गया। लंबे समय से बढ़ रही विशाल गांठ के कारण आसपास की नसें, रक्त वाहिनियां एवं महत्वपूर्ण संरचनाएं अपनी सामान्य स्थिति से हट चुकी थीं, जिससे सर्जरी तकनीकी रूप से और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई थी।---

ऑपरेशन के दौरान किन बातों का रखा गया विशेष ध्यान? सर्जरी के दौरान सबसे महत्वपूर्ण चुनौती थी रिकरेंट लेरिंजियल नर्व (Recurrent Laryngeal Nerve) को सुरक्षित रखना। यह नस हमारी आवाज को नियंत्रित करती है। यदि ऑपरेशन के दौरान यह क्षतिग्रस्त हो जाए, तो मरीज की आवाज बैठ सकती है या स्थायी बदलाव हो सकता है।

इसके अतिरिक्त शरीर में कैल्शियम का स्तर नियंत्रित करने वाली छोटी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण पैराथायरॉइड ग्रंथियों को भी सुरक्षित रखना जरूरी था। ऑपरेशन के दौरान एक पैराथायरॉइड ग्रंथि की रक्त आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए टीम द्वारा पैराथायरॉइड ऑटोट्रांसप्लांटेशन (Parathyroid Autotransplantation) किया गया।

इस उन्नत प्रक्रिया में पैराथायरॉइड ऊतक को शरीर के दूसरे सुरक्षित हिस्से में प्रत्यारोपित किया जाता है ताकि उसकी कार्यक्षमता बनी रहे और मरीज में भविष्य में कैल्शियम की गंभीर कमी न हो। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया केवल अनुभवी एंडोक्राइन सर्जनों द्वारा ही की जाती है।

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समय पर ऑपरेशन न कराने के क्या खतरे हो सकते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार थायरॉइड की बड़ी गांठ को लंबे समय तक नजरअंदाज करना गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। इनमें शामिल हैं:

श्वासनली पर दबाव पड़ने से सांस लेने में कठिनाई

भोजन नली दबने से निगलने में परेशानी

आवाज में बदलाव या भारीपन

गर्दन में दर्द एवं लगातार असहजता

अचानक गांठ का तेजी से बढ़ना

कुछ मामलों में कैंसर विकसित होने की संभावना


डॉक्टरों का कहना है कि गर्दन में किसी भी प्रकार की सूजन, तेजी से बढ़ती गांठ, आवाज में बदलाव या निगलने में परेशानी होने पर तुरंत विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए।

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डॉ. विवेक अग्रवाल ने क्या कहा?

डॉ. विवेक अग्रवाल ने बताया,
“थायरॉइड की गांठ को सामान्य सूजन समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर जांच और सही उपचार से मरीज को भविष्य की गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है। इस मरीज में गांठ का आकार काफी बड़ा हो चुका था, लेकिन हमारी टीम ने सावधानीपूर्वक सफल सर्जरी करते हुए महत्वपूर्ण नसों और पैराथायरॉइड ग्रंथियों को सुरक्षित रखा। जटिल थायरॉइड सर्जरी में अनुभवी सर्जिकल टीम और समय पर निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।”


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सर्जरी में शामिल टीम

इस जटिल सर्जरी में कई विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सर्जिकल टीम में:

डॉ. विवेक अग्रवाल – वरिष्ठ एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जन

डॉ. सुदीप्त भट्टाचार्य

डॉ. नसरीन


एनेस्थीसिया टीम में:

डॉ. सुधीर (एनेस्थीसियोलॉजिस्ट)

ऑपरेशन थिएटर एवं मरीज की देखभाल में:

आशा सिस्टर

दिव्या सिस्टर

का महत्वपूर्ण योगदान रहा।