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आशुतोष पांडेय एवं नवनीत सिकेरा से लेकर संजय कुमार वर्मा तक का चुनौती भरा सफर.!

पुलिस कप्तानों ने अपने विवेक से प्रभावी एवं सटीक निर्णय लेते हुए धीरे-धीरे पुलिस के इकबाल को बुलंद किया और अपराध का खात्मा

कप्तानों के अदम्य साहस वीरता और मजबूत फैसलों के चलते जिले को अपराध मुक्त बनाने में कहीं कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी  , मुज़फ्फरनगर। एक जमाना था  ढाई दशक पहले जब जनपद मुजफ्फरनगर को कभी अपराध की नगरी तो कभी अपराध की जननी कहा जाता था और कुछ वर्ष पूर्व तक तो यह हालात थे कि क्राइम कैपिटल की संज्ञा भी दी जाती थी, अपराध का यह वह दौर था जिसमें बड़े बड़े शातिर अपराधियों और बदमाशों ने अपराध को अंजाम देकर जिले की छवि को खराब करने का काम किया ,साथ ही राजनीति एवं जाति के आधार पर बदमाशों को संरक्षण दिए जाने की खराब परंपरा भी प्रचलित थी, वह दौर भी आया जब कुछ चुनिंदा और खास पुलिस कप्तानों ने अपने विवेक से प्रभावी एवं सटीक निर्णय लेते हुए धीरे-धीरे पुलिस के इकबाल को बुलंद किया और अपराध का ग्राफ धीरे-धीरे नीचे चला गया, इस कड़ी में सर्वप्रथम यदि हम बात करें आशुतोष पांडेय की उन्होंने जिले में सुपर कॉप के रूप में अपनी पहचान बनाते हुए अपराधियों के खिलाफ जबर्दस्त अभियान चलाया और अपने इस अभियान में वह बहुत हद तक सफल रहे, उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि अपहरण उद्योग पूरे उफान पर रहता था और खासकर दूधियाओ के अपरहण होते थे तथा कोल्हू मालिकों को भी निशाना बनाया जाता था, राहजनी और लूट की घटनाएं आम बात थी ,इन सभी बड़े अपराधों पर काम करते हुए आशुतोष पांडेय एवं उनकी टीम ने बहुत जबरदस्त मेहनत की और धीरे-धीरे उसके सार्थक परिणाम सामने आते चले गए, सुखद पहलू यह रहा कि उनके समय में ही अपहरण उद्योग पूरी तरह दम तोड़ चुका था और यह दम ऐसे ही नहीं टूटा इसके पीछे बहुत से शातिर बदमाशों की सांसे भी बंद की गई और उन्हें मुठभेड़ों में फुटबॉल पर किक की भांति मार गिराया गया, बदमाशों के खिलाफ यह ऐसा अभियान था जिसमें पुलिस ने बदमाशों को एक-एक दिन में छह एनकाउंटर हुए तो वही जनता ने भी एक कदम आगे बढ़ाते हुए ऐसे बदमाशों को मार गिराने में अपना भी अमूल्य योगदान दिया, यह जनता और पुलिस का स्वर्णिम दौर था,जनता के साथ पुलिस कप्तान का संवाद भी लाजवाब था और इनके बाद नवनीत सिकेरा ने अपने एक साल के कार्यकाल में लगभग 55 बदमाशों को मौत के घाट उतारा ,इनमें शार्प शूटर छोटा नवाब एवं कुख्यात शौकीन ,दीपक शर्मा आदि शामिल रहे । कुल मिलाकर बदमाशों के खिलाफ चले अभियान में जिले की छवि धीरे-धीरे काफी हद तक सुधरती चली गई ,उस सबसे ज्यादा जिले में टिके रहने का रिकॉर्ड आशुतोष पांडेय के नाम रहा जो लगभग पौने 3 साल तक जनपद में टिक कर अपनी सराहनीय सेवाएं देते रहे, उसके बाद बहूत कप्तान आये जिसमे विजय कुमार मोर्या, राजेश कुमार राय, अरूण कुमार के अलावा अमरेंद्र कुमार सैंगर का नाम भी आदर भाव के साथ लिया जा सकता है।उनकी लंबी पारी भी लाजवाब रही। प्रवीण कुमार की भी लंबी पारी रही। विजय प्रकाश छोटी लेकिन दमदार और बेहतरीन पारी खेलकर गये। मुजफ्फरनगर के दंगों में और उसके बाद कुछ कप्तान आये लेकिन ज्यादा नहीं टिक सके। दंगों के बाद के बी सिंह और फिर हरिनारायण सिंह ने बहुत बढ़िया काम किया, बबलू कुमार की कार्यप्रणाली को भी बहुत सराहा और याद किया जाता है। अनंत देव तिवारी के बाद मुठभेड़ो का दौर फिर शुरू हुआ,फिर एसएसपी अभिषेक आये उन्हीने भी अपराधियों को मुठभेड़ों में पीतल चखाया जो आज तक निरंतर जारी है।और अपने आने तरीके से काम करते हुए अपराधियों को मुठभेड़ों में मार गिराया गया और पुलिस का इकबाल बुलंद रखा। यदि हम बात करें अभिषेक यादव की तो उन्होंने आशुतोष पांडये का रिकॉर्ड तोड़ा और जिले में सबसे लंबी पारी का रिकॉर्ड बनाया,और पुलिस को एक नई गति और दिशा देने का काम भी किया,इनके बाद एसएसपी सुधीर कुमार सिंह आये उन्होंने भी अपराध पर प्रहार कर अपराधियों को शिकस्त देते हुए मुज़फ्फरनगर को अपराध मुक्त रखा और पुलिस लें वगैरह में बहुत काम किया,उमके बाद,अभिषेक यादव ने अपने तीन साल में नशे पर सबसे ज्यादा वार कर जिले को नशा मुक्त बनाया।उसके बाद कई कप्तानों को मुज़फ्फरनगर का चार्ज दिया गया और उन्होंने भी अपने विवेक से काम किया और नाम कमाया, इनमें विनीत जायसवाल का नाम भी शामिल है।कप्तान अभिषेक सिंह का कार्यकाल भी सराहा गया और यही से वह डीआईजी बने और डीआईजी सहारनपुर मंडल की उन्हे कमान सौपी गई।इनके बाद एसएसपी संजय कुमार वर्मा को मुज़फ्फरनगर का चार्ज दिया गया और उन्होंने अपराधियों व इनामी बदमाशो को फुटबॉल किक की तरह किक मारकर उनके अंजाम तक पहुंचाया तो वही मुठभेड़ों में जेल की हवा खिलाई साथ ही पुलिस लाइन, थानों और चौकियों का सौंदर्य करण बड़े और व्यापक पैमाने पर किया,आज की स्थिति देखकर कहा जा सकता है कि जनपद की छवि अपराध के मामले में अब कुख्यात एवं बदनाम नहीं है तो इसके पीछे कप्तानों का बड़ा योगदान रहा है जिनकी सेवाओं को यह जनपद कभी नहीं भूल पाएगा और उनका सदैव ऋणी रहेगा ,आज जिला अपहरण उद्योग राहजनी लूट डकैती आपसी रंजिश गैंगवार आदि से लगभग पूरी तरह मुक्त हो चुका है !!कुछ घटनाएं अप्रत्याशित रूप से होती रहती हैं जो कहीं भी किसी भी अपराध का ऐसा ही आधार हो सकता है जैसे कि अन्य जगह के जनपदों का, कुल मिलाकर जनपद मुजफ्फरनगर आशुतोष पांडे व नवनीत सिकेरा व कई कप्तानों के योगदान से और पुलिस कप्तान संजय कुमार वर्मा की अभी तक की कड़ी लगन मेहनत एवं समर्पण के चलते अपराध मुक्त हो चुका है और इसका श्रेय पूरी तरह ऐसे ही पुलिस कप्तानों को है जिन्होंने अपने अदम्य साहस वीरता और मजबूत फैसलों के चलते जिले को अपराध मुक्त बनाने में कहीं कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है!!इनके जोश जज्बे और योगदान को हम दिल से सैल्यूट और सलाम करते हैं। हर कप्तान का काम करने का अलग-अलग नजरिया होता है लेकिन सभी यही चाहते हैं कि उनके समय में जिला बेहतर ढंग से चले। सभी कप्तानो का योगदान अविस्मरणीय एवं अतुलनीय है।

 रिपोर्टर सत्येंद्र सैनी